गुरुवार, 9 मई 2013

क्षणिकाएं


१.

लड़की की शादी

माता पिता

दहेज़ विरोधी।

२.

लड़के की शादी

माता पिता

दहेज़ की हिमायती।

३ .

लड़की की शादी

सामत घराती की

नखरे बाराती की।

नई दुल्हन

दहेज़ लेकर आयी

घर की गृहलक्ष्मी।

५.

  नई दुल्हन

दहेज़ नहीं लायी

 कुलक्षनी।

६ .

चित्र गूगल से साभार

 

दुल्हन वही

पिया मन भाये

सास को रखे रिझाये।

  ७ .

ननद

परिवार  का नारद

बिगाड़े सास -बहु  सम्बन्ध ।

देवर

भाभी का सहारा

जब बाहर हो भैया बेचारा।

 ९

ससुर

राग अलापता सुबह शाम

बेचारा श्रोताहीन, है अ-सुर।

 १ ०

चित्र गूगल से साभार 

 

सास

लेडी गब्बारा

बहु के सर फोडती गुब्बारा।

.......................................... 

रचना :

कालीपद "प्रसाद"

सर्वाधिकार सुरक्षित 


 


 






37 टिप्‍पणियां:

अज़ीज़ जौनपुरी ने कहा…

सभी क्षणिकाएँ वर्तमान सन्दर्भ में सार्थक ,सुन्दर

Rajendra kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सार्थक हैं यें क्षणिकाएँ.

Ranjana verma ने कहा…

बहुत सही कहा यही तो होता है सुंदर प्रस्तुति!!

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत बढिया
बहुत सुंदर

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं !!

Unknown ने कहा…

वर्तमान सन्दर्भ को बयान करती खुबसूरत क्षणिकाएं परिवार की मनोदशा का वर्णन करती .....

Asha Lata Saxena ने कहा…

आज के सन्दर्भ में अच्छी क्षणिकाएं |
आशा

Prashant Suhano ने कहा…

बिलकुल सही.. खूबसूरत रचना...

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

gaagar mein sagar ..behtareen chhadikaayein

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर !

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति! मेरी बधाई स्वीकारें।
कृपया यहां पधार कर मुझे अनुग्रहीत करें-
http://voice-brijesh.blogspot.com

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं !!

Kailash Sharma ने कहा…

सुन्दर...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (10-05-2013) के "मेरी विवशता" (चर्चा मंच-1240) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

waah ....

देवदत्त प्रसून ने कहा…

नारी समस्याओं पर अच्छी क्षणिकाएं !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वैसे आज कल काफी कुछ बदल गयी हैं परिभाषायें ......

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

बहुत खूब क्षणिकाएं कहीं आपने पर आजकल रिश्तों के मायने बिलकुल बदल गए हैं |

Rewa Tibrewal ने कहा…

sundar....maza aaya padh kar

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…


आभार शास्त्री जी

Shaily Chaturvedi ने कहा…

very aptly described in very short. loved these. very well written!!

Bhola-Krishna ने कहा…

वास्तविकता का सच्चा चित्रण ! धन्यवाद , आभार ! आप जैसे सशक्त चिंतक कोई इलाज सुझाएँ क्षणिकाओं के द्वारा !प्रार्थना है ! "भोला-कृष्णा", बोस्टन [यू एस ए]

अज़ीज़ जौनपुरी ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक चित्रण ,बहुत खूब क्षणिकाएं

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

वर्तमान संद्रभ में सटीक व सार्थक.

रामराम

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

खूबसूरत प्रस्तुति

Neeraj Neer ने कहा…

bahut sundar kshanikayen.

somali ने कहा…

aaj ke sandarbh me bilkul sahi hai........sundar prastuti

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

भोला कृष्ण जी ,मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपका आभार, मेरा दूसरा ब्लॉग में "मेरे विचार मेरी अनुभूति" में "हे ! भारत के मातायों " पढ़कर अपनी राय दें .

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

bahut khoob ...!!

Prateek Sancheti ने कहा…

वर्तमान को दर्शाती सटीक पंक्तियाँ/ साधुवाद

प्रतीक संचेती

Unknown ने कहा…

सटीक व सार्थक चित्रण

Soniya Gaur ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सार्थक हैं यें क्षणिकाएँ

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

बिलकुल सही.. खूबसूरत रचना...

Unknown ने कहा…

कम शब्दों में अत्यंत सार की बाते ..अच्छा है ..आपके ब्लॉग का अनुसरण कर रहा हूँ .आप भी यदि मेरे ब्लॉग का अनुसरण करेंगे मुझे बेहद खुसी होगी ..सादर

ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

are waaaaaaaaaaaaaaaah kya bat hai bhot khub bhot khub

Jyoti khare ने कहा…


सुंदर सार्थक क्षणिकायें
बहुत खूब
सादर

पढ़ें"बूंद"


अभिषेक मिश्र ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं. स्वागत.