शनिवार, 27 अप्रैल 2013

परम्परा

१  

 पारिवारिक परम्परा 

बुजिर्गों का हथियार 

छोटों पर अत्याचार।

२  

सामाजिक परम्परा 

    नई पीडी मानते हैं 

    डाकियानुसी विचार।

 ३ 

   . पुराना परम्परा 

      है पुराना अचार 

     आज  कोई नहीं  खरीददार।  

४ 

 परम्परा का 

   अन्धानुकरण 

  कुंएं में आत्मविसर्जन। 



   परम्परा का 

      बलात पालन  

       इनकार ताजा हवा का आगौन।

 ६ 

  कोई भी परम्परा 

     पारिवारिक या सामाजिक 

    आज़ादी का हत्यारा।

 ७ 

     छुपा परम्परा 

      धर्म के आड़  में  

         होता है खतरनाक संहारक।

 ८ 

    .परम्परा  

    न टूटने वाला खूंटा 

         समाज है उस से बधां।  

कालीपद "प्रसाद"

सर्वाधिकार सुरक्षित 

 

 

28 टिप्‍पणियां:

Ranjana Verma ने कहा…

नये और पुराने परम्परा पर सुंदर हाइकू.....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

परंपरा पर सुंदर क्षणिकाएं ...
इन रचनाओं को हाइकु रचनाएँ नहीं कहा जा सकता .... हाइकु नियम से बंधी रचना है ....

तीन पंक्तियों की रचना में पहली पंक्ति में 5 वर्ण दूसरी में 7 और अंतिम में 5 वर्ण आते हैं .... आधा वर्ण नहीं गिना जाता ।

Rajendra Kumar ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति,संगीता जी के मशवरे पर ध्यान दें.

vandana gupta ने कहा…

बढिया विश्लेषण किया है

Rewa tibrewal ने कहा…

bahut sundar hiku

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

बहुत खूब ........पर ये हाइकु नहीं है
क्षणिकाएँ कहना बेहतर रहेगा

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत बढ़िया !

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी रचना
बहुत सुंदर

कालीपद प्रसाद ने कहा…

धन्यवाद संगीता जी !

Kailash Sharma ने कहा…

सुन्दर क्षणिकाएं!

अरुणा ने कहा…

परम्पराओं पर सुन्दर रचना

Maheshwari kaneri ने कहा…

परम्पराओं पर सुन्दर क्षणिकाएं ....आभार..

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत खूब हाइकू | आभार

Anita ने कहा…

कुछ परम्पराएँ अच्छी भी हैं..उन्हें त्यागना समाज के लिए घातक होगा..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार के "रेवडियाँ ले लो रेवडियाँ" (चर्चा मंच-1230) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
एक निवेदन-
कृपय अपने ब्लॉग से ताला खोलिए, जिससे चर्चा के लिए मैटर सलेक्ट करके कॉपी किया जा सके...!

कालीपद प्रसाद ने कहा…

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'जी आभार , ध्यान रखेंगे

तुषार राज रस्तोगी ने कहा…

बहुत सुन्दर |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

परम्पराएं अच्छी भी हो सकती है और खराब भी हो सकती है सबको त्यागने का कोई औचित्य नहीं है जो खराब परम्पराएं हैं उनको त्यागने कि आवश्यकता है और अच्छी परम्पराओं को अपनाने कि आवश्यकता है !!

Dr. Santosh Kumar Yadav 'Anveshak' ने कहा…

गागर मे सागर सी है आपकी रचनाएं।

किन्‍तु आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि एक बार फिर नारीवाद का असली और घृणित चेहरा सामने आ गया है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

yashoda agrawal ने कहा…


पारिवारिक परम्परा
बुजिर्गों का हथियार
छोटों पर अत्याचार।
सुन्दर क्षणिका....

Ramakant Singh ने कहा…

बहुत ही सुन्दर बोधपरक नए पुराने का सम्मिश्रण

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर और सारवान क्षणिकाएं.

रामराम.

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

परंपराओं का बदलती परिस्थितियों के अनुसार मूल्यांकन और उनमें परिवर्तन करते रहना आवश्यक है .

prritiy----sneh ने कहा…

bahut satik likha hai

shubhkamnayen

Saras ने कहा…

सुन्दर परिभाषाएं...सटीक विश्लेषण

jyoti khare ने कहा…

जीवन की अलग अलग परिभाषाएं पर जीवन के सच को जोडती हैं
वाह बहुत खूब

सतीश सक्सेना ने कहा…

सुंदर रचना ...आभार आपका !

Ramniwas Sarswat ने कहा…

सुंदर रचना ...आभार आपका !