गुरुवार, 24 जुलाई 2014

अच्छे दिन आयेंगे !



च्छे दिन आयेंगे, मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने अपने लिए कहा था |
कमल का फुल खिलेगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने पार्टी के लिए कहा था |

महंगाई कम होगी ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने नेताओं लिए कहा था |
परिवर्तन लाभ का सौदा होगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने साहूकारों लिए कहा था |
रामराज्य लौट आएगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,भ्रष्टाचारियों लिए कहा था |
हर बात का गलत अर्थ निकाला ,जो मैंने कहा था
जनता समझी अपने लिए,उनके लिए कुछ नहीं कहा था |

कालीपद "प्रसाद "
सर्वाधिकार सुरक्षित

10 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (25.07.2014) को "भाई-भाई का भाईचारा " (चर्चा अंक-1685)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

कालीपद प्रसाद ने कहा…

धन्यवाद राजेन्द्र कुमार जी |

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक सामयिक लेखन।

Anusha Mishra ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने

आशीष भाई ने कहा…

बेहतरीन , आ. धन्यवाद !
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आशीष भाई ने कहा…

आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 26 . 7 . 2014 दिन शनिवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

कालीपद प्रसाद ने कहा…

आपका आभार आशीष भाई \

Anita ने कहा…

इतनी निराशा ठीक नहीं..

संजय भास्‍कर ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने

निर्मला कपिला ने कहा…

अपसे सहमत हूं