क्षणिकाएँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
क्षणिकाएँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, 9 मई 2013
शनिवार, 27 अप्रैल 2013
परम्परा
१
पारिवारिक परम्परा
बुजिर्गों का हथियार
छोटों पर अत्याचार।
२
सामाजिक परम्परा
नई पीडी मानते हैं
डाकियानुसी विचार।
३
. पुराना परम्परा
है पुराना अचार
आज कोई नहीं खरीददार।
४
परम्परा का
अन्धानुकरण
कुंएं में आत्मविसर्जन।
५
परम्परा का
बलात पालन
इनकार ताजा हवा का आगौन।
६
कोई भी परम्परा
पारिवारिक या सामाजिक
आज़ादी का हत्यारा।
७
छुपा परम्परा
धर्म के आड़ में
होता है खतरनाक संहारक।
८
.परम्परा
न टूटने वाला खूंटा
समाज है उस से बधां।
कालीपद "प्रसाद"
सर्वाधिकार सुरक्षित
शनिवार, 16 फ़रवरी 2013
प्रेम,विरह,ईर्षा
1. प्रेम
संक्रामक है
बिना जीवाणु के।
2. प्रेम
सच्चा है ,पक्का है
रंग धीरे धीरे चढ़ता है।
3 प्रेमोन्माद
जल्दी चढ़ता है
कच्चा है ,जल्दी उतरता है।
4 प्रेम,बुखार है
चढ़ता है,कभी उतरता है
कभी नफरत ,कभी परहेज है।
5 प्रेम ,
पागलपन है
रिश्ते तोड़ता है,नया बनाता है
6 प्रेम, अँधा है
ना जात-पात ,ऊंच-नीच
ना उम्र का बंधन है।
7 विरह की अग्नि
दूर से जलती है
पास आकर बुझती है।
8 ईर्षा
दुसरे की खूशी
अपनी बर्बादी।
कालीपद "प्रसाद "
©सर्वाधिकार सुरक्षित
©सर्वाधिकार सुरक्षित
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

