गुरुवार, 24 जुलाई 2014

अच्छे दिन आयेंगे !



च्छे दिन आयेंगे, मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने अपने लिए कहा था |
कमल का फुल खिलेगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने पार्टी के लिए कहा था |

महंगाई कम होगी ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने नेताओं लिए कहा था |
परिवर्तन लाभ का सौदा होगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,मैंने साहूकारों लिए कहा था |
रामराज्य लौट आएगा ,मैंने कहा था
जनता के लिए नहीं ,भ्रष्टाचारियों लिए कहा था |
हर बात का गलत अर्थ निकाला ,जो मैंने कहा था
जनता समझी अपने लिए,उनके लिए कुछ नहीं कहा था |

कालीपद "प्रसाद "
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सोमवार, 21 जुलाई 2014

वाह !क्या विचार है !

नेताजी कहते हैं, ''उत्तर प्रदेश में आबादी ज्यादा है ,
उस हिसाब से यहाँ बलात्कार बहुत कम है "
तो क्या नेताजी हिसाब लगाकर उत्तरं प्रदेश को
'बलात्कार' में सब राज्यों में अव्वल बनाना चाहता है ?

यह जनता का प्रश्न है |

कालीपद "प्रसाद "

शनिवार, 31 मई 2014

मोदी सरकार की प्रथामिकता क्या है ?

चित्र गूगल से साभार


          
                                                                           



                आजकल टी वी ,समाचार पत्रों में धारा ३७० छाया हुआ है | हर कोई अपना अपना मत व्यक्त कर रहा है | चचाएँ हो रही है | कोई कहा रहा है ,"संविधान के अनुसार राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा इस धारा को हटा सकता है |"  दूसरा कहता है ," केवल कोन्स्तितुएन्त एसेम्ली ही इसको हटा सकती है  परन्तु वह तो अस्तित्व में नहीं है ,अत:इस धारा को हटाया नहीं जा सकता है |" नव निर्वाचित नरेन्द्र मोदी सरकार के एक मंत्री इस विषय पर वयान देकर इसे विवाद का विषय बना दिया है |
           नरेन्द्र मोदी सरकार महंगाई ,विकास ,सुशासन और भ्रष्टाचार उन्मूलन को मुद्दा बनाकर सत्तारुड हुआ है | इसीलिए सरकार को सबसे पहले इन्ही मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और उपयुक्त कदम उठाना चाहिए जिस से अनियंत्रित महंगाई का मार झेल रही जनता को महंगाई से यथा संभव मुक्ति का एहसास हो | छोटे बड़े सभी कर्मचारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए  हैं | बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता ,जनता उनसे त्रस्त हैं |इसीलिए  मोदी सरकार को धारा ३७० के बजाय भ्रष्टाचार उन्मूलन ,विकास और महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देना चाहिए और काम ऐसा करे कि १०० दिन में उसका असर नजर आने लगे |धारा ३७० के झगडे  में पड़कर ना जनता का, ना सरकार  का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश करे |अच्छा यही होगा कि एक कानूनी सलाहकार समिति बनाकर धारा ३७० को उसके हवाले कर दिया जाय जो उसके बारीकियों और प्रासांगिकता पर विचार कर जनता के सामने रख सके कि उसके रहने से जम्मु-काश्मिर  और पुरे भारत को क्या
फ़ायदा और नुक्सान होगा  और हटाने से क्या परिणाम होगा | दोनों पहलुओं का परिणाम स्पष्ट रूप में जनता को बताया  जाय ,विशेषत: इसको हटाने पर जम्मू काश्मीर के जनता को क्या फ़ायदा होने वाला  है | यदि उनका फ़ायदा ज्यादा होता है,विकास का रास्ता खुलता है तो  यह बात को यदि सही ढंग से उन तक पहुंचाया जाता है तो झगडा शायद समाप्त हो जायेगा | आज सब विकास चाहते है | समिति का रिपोर्ट आने तक कोई मंत्री उसपर कुछ ना बोले |तबतक  सब  अपना ध्यान महंगाई ,विकास ,भ्रष्टाचार ,कालाधन की वापसी आदि कार्यों में केन्द्रित करें |अपना वायदा पूरा  करे |
           पुरानी  कांग्रेस सरकार जनता की इच्छा की कोई कदर नहीं की और संवेदन हीनता से जिस प्रकार जनलोकपाल और सिटिज़न चार्टर पर प्रतिक्रिया व्यक्त किया उससे जनता में यह सन्देश गया था कि यह सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने में लगी हुई है | इसका परिणाम सबके सामने है | धारा ३७० के वजह से यदि जनता में यह सन्देश गया  कि यह मोदी  सरकार इस धारा पर विवाद खड़ा कर जनता का ध्यान भ्रष्टाचार ,महंगाई ,विकास आदि से हटाना चाहती है तो यह मोदी सरकार के लिये अच्छा नहीं होगा | अत: प्राथमिकता के आधार पर जनता से  किया गया वायदों को पूरा करने के लिए मोदी सरकार को कारगर कदम उठाना चाहिए जिससे महगाई कम हो ,भ्रष्टाचार कम हो ,विकास तेजी से हो ,महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढे ,युवाओं को रोजगार मिले ,किसान को फसल का उचित दाम मिले ,मजदूर को इज्जत से जीने लायक मजदूरी मिले| देश के विकास का रास्ता उद्योग ही प्रसस्त करता है परन्तु उद्योग मजदूरों पर निर्भर है ,इसीलिए मजदूरों का हित का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक है |
            सरकारी गोदामों में गेहू ,चावल एवं अन्य अनाज सड़ रहे हैं ,इन अनाजों की सुरक्षा और वितरण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है| मोदी सरकार का प्रथम कदम सराहनीय है कि वह काले धन की वापसी के लिए एस आई टी गठन किया है | देखना है इसका नतीजा क्या आता है ! सरकार कमजोर लोकपाल को सुधर कर मजबूत लोकपाल लाने के लिए भी कदम उठाये  ! सी बी आई को भी सरकारी नियंत्रण से निकालकर उसे स्वायत्त संस्था (Autonomous Body ) बना देंना  चाहिये जिससे वह निष्पक्ष होकर काम कर सके |
             मोदी सरकार के सामने जनहित के अपार कार्य लंबित है | पहले उन पर ध्यान दें, न  कि धारा३७०,,मंदिर या मस्जिद | इन विवादों को वार्तालाप ,सहमति और धीरज से हल किया जाना चाहिए |


कालीपद "प्रसाद "
                   

सोमवार, 19 मई 2014

क्या मोदी दूसरा मनमोहन होगा ?



          लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से जनता नई सरकार बनाती है और पुरानी सरकार को गिरा देती है ! चुनाव के समय मतदाता ही मालिक होता है और मतदान के बाद मंत्री मालिक हो जाता है ,यह एक बिडम्बना है | कांग्रेस (युपिए)सरकार की सम्बेदन हीनता ,देशव्यापी भ्रष्टाचार,मंत्रियों का भ्रष्टाचार में लिप्त होना ,सरकारी धन और साधनों का दुरूपयोग ,उद्योगपतियों को लाभ पहुँचना और जनता को महंगाई के मार से मारना ,जनता ने स्वीकार नहीं किया है| यही कारण है कि जनता ने देश के सबसे पूरानी पार्टी कांग्रेस को उखाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया है ! विरोध में बैठने लायक भी नहीं छोड़ा और मोदी को सत्तारुड कर दिया|
‘अच्छे दिन आयेंगे ‘, ‘सुशासन’ ,’सबका साथ सबका विकास’ ‘ जैसे नारों के बल पर मोदी ने पूर्ण बहुमत तो हासिल कर लिया परन्तु उसका असली परीक्षा अभी बाकी है | जनता की आशाओं और अपेक्षाओं पर खरे उतरने के लिए मोदी को अपना स्वविवेक का उपयोग करना होगा और महत्वपूर्ण मसले पर निष्पक्ष होकर जनहित में निर्णय लेना पड़ेगा ,लेकिन इनमे कुछ बाधाएं है जैसे मनमोहन के सामने बाधाएं थीं | अधिकतर लोगों का मत है कि मनमोहनसिंह एक इमानदार और योग्य प्रधान मंत्री थे  परन्तु कमज़ोर प्रधान मंत्री थे  क्योंकि वह रिमोट चालित थे |उसके पास सारे जिम्मेदारियां थीं परन्तु शक्ति नहीं थी |शक्ति कहीं किसी और के हाथ में थी ,इसलिए वह कारगर स्वनिर्णय लेने में असमर्थ रहे | मोदी को इस परिस्थिति से बचना चाहिए| जैसा कि खबर है कि आर .एस ,एस ने घर घर अपना कार्यकर्ता को भेज कर मोदी का प्रचार किया ,यदि यह सच है तो आर .एस ,एस चाहेगा कि मोदी उनकी इच्छानुसार काम करें | आर .एस ,एस के  सिद्धांत का पालन करना अच्छा है परन्तु दिन प्रतिदिन के सरकारी काम काज उनके आदेश से हो ,यह ठीक नहीं | यह मोदी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है |उसे दूसरा मनमोहन बनाकर रख देगा ,इसीलिए मोदी को देश हित और जनहित को ध्यान रखकर स्वतंत्र निर्णय लेना चाहिए | आर .एस ,एस -रिमोट कंट्रोल से मुक्त होना चाहिए |तभी वह अपने को एक काबिल और सशक्त प्रधान मंत्री सिद्ध कर पाएंगे |
    दूसरी समस्या उद्योग पतियों की ओर से होगी | उद्योगपतिओं ने जो धन बी जे पी के प्रचार में खर्च किये हैं वे उसे कई गुणाकर वसूलने की कोशिश करेंगे|इसके लिए मोदी पर पार्टी का दबाव भी होगा|इसमें भी मोदी को जनहित का ध्यान रख कर फैसला लेना होगा !यदि उद्योगपतियों को खुला छोड़ दिया और पट्रोल जैसे बहुप्रभावी वस्तु का दाम बढाने की आजादी दी गई तो सभी वस्तुओं का दाम बढ़ जायेंगे और महंगाई की मार झेल रही जनता को और ज्यादा मार झेलनी पड़ेगी | इस से जनता में रोष फ़ैल जायेगा |अत: मोदी सरकार को महंगाई को नियंत्रण में रखने के कारगर कदम उठाना पड़ेगा |
     मोदी पर कई बार लोगो ने आरोप लगाया है कि वह एर्रोगंट (arrogant)है |  इसका क्या कारण है ,यह तो नहीं पता ,परन्तु यदि उसमे ऐसा कुछ है तो उसे छोड़ना पड़ेगा और उनके आदर्श पुरुष अटल बिहारी बाजपेयी जैसे धैर्यवान ,विवेकशील पुरुष बनकर राजधर्म का पालन  करना पड़ेगा ,तभी वह एक स्वतंत्र ,सशक्त,सर्वमान्य  प्रधान मंत्री बन पायेगा|

कालीपद "प्रसाद "
18 /०५/२०१४











सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

शब्द और ईश्वर !!!



            हर शब्द की उत्पत्ति इन्सान ने किसी विशेष अर्थ /अनुभव /एहसास इत्यादि व्यक्त करने के लिए किया है इसीलिए शब्द शक्ति सिमित है ,ईश्वर को इन शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता क्योंकि ईश्वर अनंत है, असीमित है l यही कारण है आजतक सभी धर्मशास्त्र ईश्वर का सही स्वरुप को व्यक्त करने में असमर्थ रहे है क्योंकि .कोई भी धर्म शास्त्र पूर्ण नहीं है जबकि ईश्वर पूर्ण हैंl
             मानवीय अनुभितियाँ भी अनंत हैं ,इसका आयाम भी अनंत है अत : मानव की हर अनुभूति को शब्द व्यक्त नहीं कर सकता| गुड मीठा है ,शक्कर मीठा है ,शहद मीठा है, पर हर मिठास अलग अलग है ,बहुत सूक्ष्म अंतर है , उस अंतर को निश्चित रूप से बताने वाला कोई शब्द नहीं है |उसीप्रकार कोई शब्द भी ईश्वर को ठीक ठीक परिभाषित नहीं कर पाता या यूँ कहे कोई शब्द ईश्वर तक पहुँच नहीं पाता | सब शब्द ईश्वर के आसपास घूमते हैं पर ईश्वर तक पहुँच नहीं पाते| इसीलिए इंसान भी ईश्वर को जान नहीं पाया ! जिस दिन ईश्वर तह पहुँचने वाला शब्द की उत्पत्ति होगी उसी दिन इंसान को ईश्वर मिल जायेंगे !

    Every word is  created by man to express some specific meaning/experience/feelings/perception/realization,hence power of words is limited .With these words GOD can not be described/defined/reached because GOD is eternal,boundless,infinite,measureless.
With these limited meaning of words all religious books are written, that is why these books are unable to describe/define GOD's form and HIS existence. These books are imperfect and GOD is PERFECT.
        Human perceptions are unlimited/infinite .Every perception can not be expressed by existing words, for example sugar is sweet and honey is also sweet but there is very minute difference in their sweetness.There is no word to describe that difference.Exactly the same way word-power can not exactly define or describe GOD.It revolve round GOD, can not reach GOD. God is beyond word power. The day man is able to create the word to define/reach GOD,Man will reach GODNESS.

कालीपद "प्रसाद "
©सर्वाधिकार सुरक्षित

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

शिशु



                    
चित्र गूगल से साभार !
छोटा सुदर्शन अवोध शिशु
माँ के गोद में लेटा निश्छल शिशु
कभी मुस्कुराता है
कभी जोरजोर से रोता है
कभी ऊँगली मुहँ में डालता है
कहता है मानो ,मुहँ ही ब्रह्माण्ड है l
कभी जीभ निकालकर
दुनियाँ वालों को चिढाता है ,
कभी किसी बात पर हँसता है
कभी गंभीर एकटक निहारता है ,
कभी जोरसे चीखकर अपनी
नाराजगी का इज़हार करता है l
उसकी ख़ुशी हो या गम
आ ..आ ..ओ ..ओ .वो.. की ध्वनि
उसके शब्दकोष का प्रथम शब्द
मानव शब्दकोष की जननी l
भूख लगती है तो
मुख खोलकर दिखाता है ,
माँ ना समझे तो
रोने लगता है l
दूध पी कर सो जाता है दुनियाँ को भूलकर
किन्तु फिर उठता है दुगुना ताजा होकर l
ज्यादा देर सोना उसे पसंद नहीं
सुस्त बैठना भी उसे रास आता नहीं
उसे तो खड़ा होना है
अपने पैरों पर नाचना है
खुद खुश होना है
औरो को भी खुश करना है l
उसका निष्पाप निश्छल अलाप
धो देता हैं मनुज के मन के पाप
करता है दूर कलुष, सब मनस्ताप l  
तन मन हो जाता है पवित्र ,शिशु संग
कोरा ,निर्मल और निष्कलंक l

रचना : कालीपद “प्रसाद “
सर्वाधिकार सुरक्षित